गुलबर्ग हत्याकांड: गुजरात दंगा के दोषी भरत राजपूत जमानत जमानत पर रिहा

अहमदाबाद। गुजरात उच्‍च न्‍यायालय ने गुलबर्ग हत्‍याकांड में जीवन पर्यंत कैद की सजा पाने वाले भरत राजपूत को जमानत पर रिहा कर दिया है। 2002 के दंगों के दौरान गुलबर्ग सोसायटी में पूर्व कांग्रेस सांसद अहसान जाफरी समेत 69 लोगों की हत्‍या कर दी गई थी।



दंगा मामलों के लिए गठित विशेष अदालत ने वर्ष 2016 में भरत राजपूत समेत 11 लोगों को जीवन पर्यंत कैद की सजा सुनाई थी। इन सभी पर 28 फरवरी 2002 को अहमदाबाद की गुलबर्ग सोसायटी में हुए दंगा व हत्‍या का दोष सिद्ध हुआ था, इनके अलावा 13 अन्‍य आरोपी को दोषी पाए जाने पर दस–दस साल की सजा सुनाई थी। राजपूत के वकील ने उच्‍च न्‍यायालय के न्‍यायाधीश बेला त्रिवेदी एवं न्‍यायाधीश ए सी राव के समक्ष कहा कि एक अन्‍य अभियुक्‍त लाखासिंह चूडास्‍मा को गत 30 जुलाई को जमानत पर रिहा किया जा चुका है।


भरत राजपूत का नाम 2002-03 में गवाहों की ओर से दिए गए बयानों में शामिल नहीं है इसके अलावा गवाहों की ओर से उच्‍च्‍तम न्यायालय में पेश शपथ पत्रों में भी उनके नाम का उल्‍लेख नहीं है। राजपूत का नाम पहली बार वर्ष 2008 में विशेष अदालत में दंगा मामलों के स्‍थानांतरण के बाद शामिल किया गया था। केवल तीन गवाहों ने भरत राजपूत के नाम का उल्‍लेख किया उनमें से भी एक गवाह सईद खान उन्‍हें ट्रायल के दौरान कोर्ट रूम में नहीं पहचान सका था।


गौरतलब है कि लाखासिंह को इसी आधार पर जमानत पर छोड  दिया गया था। गौरतलब है कि वर्ष 2019 में अब तक लाखा सिंह चूडास्‍मा के अलावा करीब 15–15 साल से जेल में बंद कैलाश धोबी, जयेश जिणगर, जयेश परमार तथा करीब नौ–नौ साल तक जेल में बंद रहे दिनेश शर्मा, राजू तिवारी तथा नारायण चेनावाला को जमानत पर रिहा किया जा चुका है। इस मामले के तीन दोषी भरत तेली, योगेंद्र शेखावत व क्रष्णा अभी जेल में बंद हैं।