शक के कफन में दफन हुआ प्यार

 


विवेक और चंदना एक-दूसरे को दिलोजान से चाहते थे। कुछ दिनों बाद चंदना के व्यवहार को देख कर विवेक के दिल में एक शक बैठ गया। उस शक को दूर करने के बजाए विवेक ने ऐसा काम कर डाला कि उस का प्यार कफन में दफन हो गया।
उत्तर प्रदेश के जिला गाजीपुर के थाना बहरियाबाद क्षेत्र में एक गांव है बघांव। पेशे से अध्यापक दीपचंद राम अपने परिवार के साथ इसी गांव में रहता था। उस के परिवार में पत्नी सुमन के साथसाथ 2 बेटे थे सुरेश और सुरेंद्र तथा 2 बेटियां थीं चंदना और वंदना। चंदना सब से बड़ी, समझदार और खूबसूरत लड़की थी। वह दीपचंद और सुमन की लाडली थी।


16 मार्च, 2018 की सुबह करीब 9-10 बजे चंदना मां से खेतों पर जाने को कह कर घर से बाहर निकली तो दोपहर के 1 बजे तक घर नहीं लौटी। दीपचंद और सुमन को चिंता हुई। सयानी बेटी के इस तरह से गायब हो जाने से मांबाप परेशान हो गए। उन्होंने अड़ोस-पड़ोस में चंदना को ढूंढा, लेकिन उस का कोई पता नहीं चला। उन की समझ में नहीं आ रहा था कि चंदना रहस्यमय तरीके से कहां लापता हो गई।



मामला जवान बेटी से जुड़ा था, इसलिए संवेदनशील दीपचंद ने यह सोच कर इस बारे में किसी को नहीं बताया कि व्यर्थ में अंगुलियां उठने लगेंगी। धीरे-धीरे शाम ढलने लगी, लेकिन चंदना घर नहीं लौटी। ऐसे में दीपचंद और सुमन की घबराहट और बेचैनी बढऩी स्वाभाविक ही थी।


दोनों बेटी के बारे में सोचसोच कर परेशान थे। उन की बेचैनी और चंदना को ढूंढने की वजह से कुछ लोगों ने अनुमान लगा लिया था कि चंदना गायब है। फलस्वरूप धीरेधीरे यह बात पूरे गांव में फैल गई थी। गांव वाले चंदना को ले कर तरहतरह की बातें करने लगे थे। जब शाम तक चंदना का कहीं पता नहीं चला तो दीपचंद गांव के कुछ लोगों को साथ ले कर बहरियाबाद थाने पहुंचा।


थानाप्रभारी शमीम अली सिद्दीकी थाने में ही मौजूद थे। जब दीपचंद अन्य लोगों के साथ थाने पहुंचा तब तक अंधेरा घिर आया था। थानाप्रभारी ने दीपचंद से रात में थाने आने का कारण पूछा तो दीपचंद ने उन्हें पूरी बात बता दी।


मामला गंभीर था। दीपचंद की बातें सुन कर थानाप्रभारी सिद्दीकी ने लिखने के लिए एक सादा पेपर दीपचंद की ओर बढ़ा दिया और तहरीर लिख कर देने के लिए कहा। दीपचंद ने तहरीर लिख कर दे दी। पुलिस ने दीपचंद की तहरीर पर चंदना की गुमशुदगी की सूचना दर्ज कर के जरूरी काररवाई शुरू कर दी।


लहूलुहान हालत में मिली चंदना की लाश


अगली सुबह यानी 17 मार्च को बघांव का रहने वाला लल्लन यादव गांव के बाहर अपने खेत में पंपिंग सेट देखने पहुंचा। उस ने अपने खेत में पंपिंग सेट लगा रखा था। पैसा ले कर वह दूसरों के खेतों की सिंचाई किया करता था। खेतों में पहुंच कर लल्लन की नजर गेहूं की फसल पर पड़ी तो उसे कुछ अजीब सा लगा। खेत के बीच में काफी दूर तक फसल रौंदी पड़ी थी। ऐसा लग रहा था जैसे किसी जानवर ने खेत में घुस कर उत्पात मचाया हो।


पड़ताल करने के लिए लल्लन अंदर पहुंच गया। उस की नजर जब बरबाद हुई गेहूं की फसल पर पड़ी तो वह वहां का नजारा देख घबरा गया। वह वहां से भागा तो सीधा दीपचंद के घर ही जा कर रुका।


दीपचंद जिस बेटी को 24 घंटे से तलाश कर रहा था, उस की अर्द्धनग्न लाश लल्लन यादव के खेत में पड़ी थी। किसी ने उस के गले और पेट पर चाकू से अनगिनत वार कर के मौत के घाट उतार दिया था।


चंदना की लाश मिलते ही दीपचंद के घर में कोहराम मच गया। दीपचंद और गांव के तमाम लोग लल्लन के खेत पर जा पहुंचे, जहां चंदना की रक्तरंजित लाश पड़ी थी। चंदना की लाश देख कर गांव वालों ने अनुमान लगाया कि हत्यारों ने दुष्कर्म करने के बाद अपनी पहचान छिपाने के लिए उस की निर्ममतापूर्वक हत्या कर दी होगी। लोगों ने घटनास्थल देख अनुमान लगाया कि हत्यारों की संख्या 2-3 से कम नहीं रही होगी, क्योंकि काफी दूरी तक गेहूं की फसल रौंदी हुई थी।



भीड़ में से किसी ने 100 नंबर पर फोन कर के घटना की सूचना पुलिस कंट्रोलरूम को दे दी। कंट्रोलरूम से वायरलैस सेट पर यह सूचना बहरियाबाद थाने को दे दी गई। इस घटना से गांव वाले काफी गुस्से में थे। उन लोगों ने चंदना की लाश ले कर बहरियाबाद-चिरैयाकोट मार्ग (गाजीपुर-मऊ मार्ग) पर जाम लगा दिया।


कंट्रोलरूम से दी गई सूचना के आधार पर बहरियाबाद थानाप्रभारी शमीम अली सिद्दीकी पुलिस टीम के साथ घटनास्थल पर पहुंच गए। उन की टीम में एसआई विपिन सिंह, प्रशांत कुमार चौधरी, विकास श्रीवास्तव, संजय प्रसाद, दिनेश यादव शामिल थे। पुलिस को देखते ही ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा। वे पुलिस प्रशासन के खिलाफ नारे लगाने लगे।


शमीम अली सिद्दीकी ने स्थिति की नजाकत को समझते हुए कप्तान सोमेन वर्मा को फोन कर के फोर्स भेजने का आग्रह किया। पुलिस कप्तान ने तत्काल सीओ (सैदपुर) मुन्नीलाल गौड़, सीओ (भुड़कुड़ा) प्रदीप कुमार, सीओ (जखनिया) आलोक प्रसाद सहित जिले के कई थानों के थानाप्रभारियों को मौके पर पहुंचने का आदेश दिया। वह खुद भी मौके पर पहुंच गए।


कुछ ही देर में बहरियाबाद-चिरैयाकोट मार्ग पर खाकी वरदी ही वरदी नजर आने लगीं। पुलिस ने पंचनामा के लिए चंदना की लाश लेने की कोशिश की तो प्रदर्शनकारियों ने पुलिस को लाश देने से मना कर दिया। उन की 2 मांगें थीं, पहली यह कि घटनास्थल पर डौग स्क्वायड को बुलवाया जाए और दूसरी यह कि हत्यारों को जल्द से जल्द गिरफ्तार किया जाए।


गांव वालों का विरोध प्रदर्शन


पुलिस कप्तान सोमेन वर्मा ने लोगों की पहली मांग पूरी करने में असमर्थता जताई, क्योंकि जिले में डौग स्क्वायड की कोई व्यवस्था नहीं थी। अलबत्ता उन्होंने प्रदर्शनकारियों की दूसरी मांग पूरी करने का भरोसा देते हुए वादा किया कि हत्यारों को 24 घंटे के अंदर गिरफ्तार कर लिया जाएगा।


पुलिस की 5 घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद एसपी वर्मा के आश्वासन पर गांव वाले शांत हुए। पुलिस ने जल्दीजल्दी पंचनामा भर कर लाश पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल भिजवा दी। इस के साथ ही अज्ञात हत्यारों के खिलाफ भादंवि की धारा 302, 201 के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया गया। घटना की तफ्तीश की जिम्मेदारी थानाप्रभारी शमीम अली सिद्दीकी को सौंपी गई।


चंदना की हत्या किस ने और क्यों की, पुलिस के लिए यह गुत्थी सुलझाना आसान नहीं था। थानाप्रभारी ने सब से पहले घटनास्थल का दौरा किया और फिर मृतका चंदना के घर जा कर उस के पिता दीपचंद से पूछताछ की। दीपचंद ने थानाप्रभारी को बताया कि उस की या उस की बेटी चंदना की किसी से कोई अदावत नहीं थी। वैसे भी चंदना अपने काम से मतलब रखती थी। वह किसी के घर भी ज्यादा नहीं उठतीबैठती थी।


चंदना हत्याकांड की गुत्थी काफी उलझी हुई थी। जांच अधिकारी के लिए यह मामला काफी चुनौतीपूर्ण था। उधर चंदना की पोस्टमार्टम रिपोर्ट भी आ गई थी। रिपोर्ट में बताया गया कि उस के साथ दुष्कर्म नहीं हुआ था। उस की मौत का कारण अत्यधिक खून बहना बताया गया था।