राजस्थान में जनता नहीं, अब पार्षद चुनेंगे महापौर और निकाय अध्यक्ष

राजस्थान नगर निकाय चुनाव- 2019


जयपुर । प्रदेश में होने वाले नगर निकाय चुनावों में अब जनता नहीं, बल्कि पार्षद ही नगर निकाय सभापति, चेयरमैन और महापौर को चुनेंगे। यानी निकाय प्रमुख का चुनाव अब अप्रत्यक्ष रूप से होगा। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट मीटिंग में यह फैसला लिया गया। नवंबर में प्रदेश में नगर निकाय व निगमों के चुनाव होने हैं। स्वायत्त शासन मंत्री शांति धारीवाल ने इस निर्णय की पुष्टि की।



धारीवाल ने बताया कि कैबिनेट बोर्ड ने कई कारणों से यह बदलाव किया है। उन्होंने कहा देश में आज असुरक्षा, जनता में भय आक्रोश और हिंसा का माहौल है। भाजपा जनता को जातिवाद में बांटने की कोशिश कर रही है। हम चाहते हैं जनता में प्रेम बना रहे। प्रत्यक्ष तरीके से चुनाव हुआ तो हिंसक घटनाएं हो सकती हैं। 


जयपुर, जोधपुर, कोटा में होंगे 2-2 मेयर


राजस्थान में निकाय चुनाव से पहले गहलोत सरकार ने बड़ा फैसला किया। अब प्रदेश की राजधानी जयपुर समेत तीन बड़े शहरों में दो-दो नगर निगम होंगे। इन तीनों शहरों में दो-दो मेयर होंगे। राजस्थान के संसदीय कार्य और शहरी विकास मंत्री शांति धारीवाल जयपुर में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में इसका ऐलान करते हुए कहा कि जयपुर, कोटा, जोधपुर में 2-2 मेयर होंगे। उन्होंने बताया कि अभी यह आदेश लागू नहीं होगा। पूर्व में प्रस्तावित निकाय चुनाव के प्रथम चरण में अब इन तीनों शहरों की छह नगर निगमों में चुनाव नहीं होंगे। लेकिन आगामी 6 महीनों में राज्य सरकार को यहां चुनाव करवाने होंगे।


पिछली सरकार में कांग्रेस ने लागू की थी व्यवस्था


कांग्रेस ने पिछली सरकार के समय यह व्यवस्था लागू की थी। इसके बाद जयपुर में कांग्रेसी की पहली निर्वाचित मेयर ज्योति खण्डेलवाल बनी थी। हालांकि तब जयपुर नगर निगम में बोर्ड बीजेपी पार्षदों का बना था। तब कई बार मेयर और बोर्ड के बीच संघर्ष की स्थिति दिखी थी। कई फैसले नहीं हो सके थे। कई बार बोर्ड में शामिल पार्षदों व महापौर के बीच टकराव की नौबत आई थी। 


पीएम मोदी की लहर देखकर घबराई कांग्रेस : भाजपा


कांग्रेस सरकार के इस फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष सतीश पूनिया ने बताया कि धारा 370 हटाने और केंद्र सरकार के कई अहम निर्णयों के बाद देश और प्रदेश में नरेंद्र मोदी की लहर चल रही है। हाल ही में लोकसभा चुनावों में भारी जीत से कांग्रेस सरकार घबरा गई। सरकार का यह फैसला बौखलाहट और घबराहट के अलावा हार के डर को दर्शाता है। सरकार चाहे कोई भी निर्णय कर लें, भाजपा आगामी निकाय चुनाव में बड़ी जीत हासिल करने वाली है। राजस्थान की अशोक गहलोत सरकार निकाय चुनावों में विशेष प्रावधान की सरकार के ही दो मंत्री खिलाफत कर चुके हैं। नई व्यवस्था के तहत अब पार्षद का चुनाव नहीं लडऩे वाले व्यक्ति और हारे हुआ प्रत्याशी को भी मेयर-सभापति बनने की छूट होगी।


इस पर परिवहन मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास और खाद्य नागरिक आपूर्ति मंत्री रमेश मीणा  ने निकाय प्रमुखों के चुनाव के इस तरीके को गलत बताया है।


सचिन पायलट ने हाईब्रिड को बताया गलत, कहा इससे बैकडोर एंट्री बढ़ेगी


निकाय प्रमुख के चुनाव का हाईब्रिड मॉडल उतारने वाला राजस्थान देश का पहला राज्य बना है। इसकी अधिसूचना जारी होने के बाद से ही विरोध भी सामने आ रहा है। डिप्टी सीएम सचिन पायलट ने भी इसे लेकर कहा है कि कैबिनेट में इसकी चर्चा नहीं हुई, इसे हाइब्रिड नाम दिया जा रहा है वह गलत है, इससे बैकडोर एंट्री बढ़ेगी। उधर, बीजेपी ने कहा है कि हाल ही में लोकसभा चुनावों में भारी जीत से कांग्रेस सरकार घबरा गई है और यह फैसला बौखलाहट और घबराहट के अलावा हार के डर को दर्शाता है।