नागरिकों की निगरानी का खतरा

आज की दुनिया की पारिस्थितिकी ऐसी है, जो राज्य सरकारों और नॉन स्टेट ऐक्टरों, दोनों को लोगों पर निगरानी रखने के लिए पर्याप्त अवसर उपलब्ध कराती हैएक से एक उपकरण की बाढ़ और लोगों की उन पर बढ़ती निर्भरता ने संबंधित लोगों और संस्थाओं के लिए आंकड़ों पर निगरानी रखने की और भी उर्वर जमीन उपलब्ध करा दी हैइस्माइली फर्म के स्पाइवेयर पेगासस के जरिये व्हाट्सऐप पर पत्रकारों और सामाजिक कार्यकर्ताओं की जासूसी के हालिया रहस्योद्धाटन से पता चलता है कि किस तरह भोले-भाले लोगों पर उनकी जानकारी के बगैर निगरानी रखी जा सकती हैअलबत्ता डाटा संचालित अर्थव्यवस्था और समाज में, जहां डाटा ही तमाम लेन-देन और विचार-विमर्श के मूल में हैं, इस तथ्य की अनदेखी भी नहीं की जानी चाहिए कि इलेक्ट्रॉनिक डाटा में अवरोध पैदा करना दिनोंदिन बेहद मुश्किल होता जा रहा हैहालांकि इस संदर्भ में यह भी नहीं भूलना चाहिए कि डाटा की गैरकानूनी तरीके से मॉनिटरिंग या इनमें अवरोध पैदा करना किसी भी देश के मौजूदा कानूनी ढांचे और उनके प्रावधानों के खिलाफ हैं। हर देश के कानूनी ढांचे के पास गैरकानूनी तरीके से अवरोध डालने या मॉनिटरिंग को रोकने और इसकी जांच-पड़ताल करने की व्यापक गुंजाइश होती है___ लेकिन जासूसी के मौजूदा खुलासे को देखते हुए यह कहना पड़ता है कि अगर निगरानी या जासूसी करने की इस प्रवृत्ति पर तत्काल प्रभाव से रोक नहीं लगाई गई, तो यह राज्य द्वारा अपने लोगों की जासूसी करने के एक विराट तंत्र में तब्दील हो सकती है। अगर ऐसा हुआ, तो यह सिर्फ उन्हीं लोगों के लिए खतरनाक नहीं होगा, जिनके डाटा पर निगरानी रखे जाने की आशंका है, बल्कि व्यापक अर्थ में यह हमारी स्वतंत्रता और नागरिक अधिकारों के लिए भी एक बड़ा खतरा होगाइसलिए इस मामले में सभी हितधारकों को अपनी निजता को सुरक्षित और संरक्षित करने के लिए एकजुट होना चाहिए और उनको इस बारे में एकमत होना चाहिए कि वे गैरकानूनी ढंग से निगरानी के शिकार नहीं बनेंगेभारत ऐसा देश है, जिसका एक जीवंत संविधान हैयही नहीं, हम सबके पास संविधान द्वारा प्रदत्त मौलिक अधिकार हैं, जिनमें जीने का अधिकार भी शामिल है। एक संप्न भु देश होने के नाते भारत सरकार के पास सूचना तकनीक कानून, 2000 की धारा 69 के तहत इलेक्ट्रॉनिक सूचनाओं को रोकने का अधिकार हैइसमें कहा गया है कि देश की संप्रभुता और सुरक्षा, दूसरे देशों के साथ दोस्ताना रिश्तों, शालीनता तथा नैतिकता की रक्षा के लिए तथा किसी संज्ञेय अपराध को रोकने के लिए सरकार अपने इस अधिकार का इस्तेमाल कर सकती है


-राव संजय सिंह।