"राजस्थानी संस्कृति"

"                 "राजस्थानी संस्कृति"
राजस्थानी संस्कृति के स्वरुप की बात करूं तो मेरे व्यक्तिगत मतानुसार " यह एक एसी विचारधारा है जिसने मरुधरा को एक गौरवपूर्ण इतिहास दिया जो विश्व की संस्कृतियों में अग्रणी स्थान रखता है,इसी विचारधारा ने इस कठिन भौगोलिक परिवेश में जीवित रहने और समाज निर्माण की परिस्थितियां उत्पन्न की जो यहाँ के रीति रिवाजों,बोली,लोक कथाओ और लोक गीतों में स्पष्ठ झलकती है, राजस्थानी संस्कृति उस जीवनशैली का नाम है जिसने एक मरुस्थलीय प्रदेश के जीवन को उन प्रदेशों से भी आगे खड़ा किया जिनमें प्राकृतिक संसाधनो की प्रचूरता थी। जहाँ एक और यह प्रकृति की विषमताओं से सामंजस्य और अनुकूलन का विज्ञान है वहीं दूसरी और ये एक संगीत है जो माढ के सुरों और रावण हत्थे की ध्वनी से गूंजता है, एक त्याग की परम्परा है जो हर एतिहासिक ईमारत की गाथा है।
जल संरक्षण से अवगत कराने वाली पहली संस्कृति है।
राष्ट्रहित बलिदानों की सबसे लम्बी शृंखला प्रस्तुत करने वाली और "जननी और जन्म भूमि स्वर्ग से भी बढकर है" का उदाहरण देकर वैदिक साहित्य का सम्मान बढ़ाने वाली संस्कृति है। बप्पा रावल से से लेकर महाराणा प्रताप सरीखे कई प्रेरणा स्त्रोतों को संजोए वीर गाथाओं की एक अनुपम एतिहासिक महत्व की धरा है। राजस्थानी संस्कृति वीर और श्रृंगार रस की चारण रचित अद्वितीय डिंगल साहित्य की केंद्रीय विषय-वस्तु है। 
राजस्थानी संस्कृति एक स्वाद है जो बाजरे की रोटी और केर-सांगरी के साग (सब्जी) में मिलता है। 
यह एक आनंदमयी समय चक्र है जो यहाँ के तीज त्योंहारो से चलता है। यह एक मीठा सुख है जो यहाँ के बाल सुलभ खेलों में मिलता है,कठपुतलियों के खेलो में मिलता है। 
राजस्थानी संस्कृति एक बहुआयामी लोक दर्शन है जो यहाँ तेजाजी रामदेवजी और अन्य स्थानीय मेलों में देखने को मिलता है।
राजस्थानी संस्कृति एक रंगीन आवरण है जो लहरिया पोमचे,चुनड़ी और दूसरे परिधानों पर खिलता है,तो कभी गर्व के रूप में पाग (साफा) बनकर यहाँ के लोगों की गरिमा को दर्शाता है।
राजस्थानी संस्कृति इसकी मनुहारों में छिपी है जो इसकी बोली (भाषा)में निहित जो केवल प्रेम और प्रेम की भाषा है। जो विचारो की अभिव्यक्ति का सबसें सुन्दर तरीका है और मान सम्मान का प्रथम अध्याय भी।
राजस्थानी संस्कृति शिल्प है जो यहाँ की एतिहासिक इमारतो और बोर,टेवटा,आड,रखड़ी (आभूषण) में महीनता से उकेरा हुआ है।
इसपर लिखने का ना मेरा सामर्थ्य है ना शब्दकोष।
इसकी व्याख्या शब्दों में नहीं बल्कि यहाँ जीवन जीकर
इसे आत्मसात करने में ही सम्भव है।
शब्द हमेशा कम ही पड़ेगे इसे लिखने के लिए। 


फिर भी यदि एक शब्द में कहूँ की ये राजस्थानी संस्कृति क्या है तो मेरा जवाब होगा "माँ" । जिसने राजस्थान को जन्म दिया और पाल पोष कर बड़ा किया।



                   शैलेंद्र सिंह नूँदड़ा