बैलगाड़ी ...

बैलगाड़ी....
इंडिया जाने के लिए जब मैंने छोड़ी  थी भारत की वो खुशनुमां गलियां ....मुझ से लिपट कर वो खूब रोया था मेरे साथ....मुझ से बिछड़ जाने के बाद उस भारत को बिज्जी की कुछ कहानियों के अलावा कहीं पनाह नहीं मिली..उस दिन के बाद भारत मानों बंजारा हो गया .....जो कभी गाँव के मेलो की शान बनकर हाटो में गर्मजोशी से मिलता था...अब उसका विकृत रूप हैंडीक्राफ्ट्स के शो-रूम में बिकता है "एंटीक्स" बनकर। 
कुछ समय पहले ही किसी ए.सी. ऑफिस में एक बैलगाड़ी का खिलौना देखा अपना रास्ता भटक आया था शायद.....और किसी बचपन को आबाद करने के बजाय किसी बच्चे से  रूठ कर वहां बैठा था....
जब मैंने उन साहब से पूछा कि ये बैल-गाड़ी कहाँ से लाए? उन्होंने मेरी तरफ गर्व से देखते हुए कहा "सर, दिस इज अ यूनीक पीस ऑफ इंडियन हैंडीक्राफ्ट्स । आई गोट इट इन एन एग्जिबिशन।....इट्स क्वाईट ब्यूटीफुल। आई लव दिस" 
उन्होंने उसे मुझे छू कर देखने को कहा और उसे उठा कर मेरे पास लाये.....अचानक उनके चेहरे के भाव बदल गए....उन्होंने चपरासी को बुलाया और उसे डांटना शुरू कर दिया क्यों कि उस खिलौने पर मिट्टी जमीं थी....चपरासी ने "सॉरी" कहा.....और मैंने उन्हें "थैंक यू"...
जब मुझसे थैंक यू का कारण  पूछा गया तो मैंने कहा "इस खिलौने की जगह यहाँ नहीं इसके दोस्त के पास है जहाँ यह मिटटी में उसके साथ खेलने को बना है .....आपने ज्यादा कीमत देकर इसका दोस्त छीन लिया लेकिन चपरासी ने इस पर ध्यान ना देकर इसे इसकी मिट्टी लौटा दी। यहाँ कोई बच्चा तो है नहीं जो इसके साथ खेले और इसके होने को सार्थक करे....कम के कम इस मिट्टी से इसे इसके घर की याद तो मिली।"
.....थोड़े से सन्नाटे के बाद ऑफिस में बैल बजी और चपरासी को बुलाकर वो खिलौना उनके बच्चे के लिए दे दिया गया..."थैंक यू" के साथ।
और अगली आवाज थी "व्हाट यू हेव मेड टुडे इज एन एक्स्ट्रा लार्ज फॉर मी"
मैंने कहा "व्हाई डोंट यू आस्क मी देट हैव आई मेड इट लार्ज? "
फिर अगली शाम उस ऑफिस की छत पर हुई और अगली आवाज थी ग्लास में घूमते बर्फ के कुछ टुकड़ो की जो धीरे धीरे घुलकर लाल हो रहे थे। :) -शैलेंद्र सिंह नूंदडा